विशेषण • युद्धपूर्व |
pre-war मीनिंग इन हिंदी
pre-war उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- But , on the whole , the pre-war trends continued to operate .
लेकिन , मोटे तौर पर , युद्ध पूर्व की स्थिति चलती रही . - The railways were by far the biggest commercial undertaking in the pre-war years .
युद्ध पूर्व के वर्षों में रेलवे ही सब से बड़ा व्यापारिक संस्थान था . - But once again in 1948-49 they were back at the pre-war level of 1.3 million tons .
सन् 1948-49 में एक Zबार Zइफर , निर्यात युद्ध-पूर्व के स्तर 13 लाख टन तक पहुंच गया . - It went up from the pre-war average of 94 per cent to about 98 per cent during 1919-23 .
यह युद्ध पूर्व के 94 प्रतिशत के औसत से बढ़कर सन् 1919-23 में 98 प्रतिशत के औसत तक हो गया . - The pre-war level was exceeded after 1950 , and in 1952 the output was nearly 1.5 million tons .
सन् 1950 के बाद युद्ध पूर्व का स्तर बढ़ गया था और सन् 1952 में उत्पादन लगभग 15 लाख टन था . - They fluctuated but remained much above the pre-war level during the years after Partition .
इसमें उतार चढ़ाव भी आते रहे परंतु विभाजन के बाद के वर्षों में युद्ध पूर्व के स्तर से यह कुछ अधिक ही रहा . - It increased from about 7 Ib in the pre-war years to about 11 Ib in 1944 and impressively to 30 Ib in 1956 .
यह युद्धपूर्व के वर्षों के सात पौंड से बढ़कर सन् 1944 में लगभग 11 पौंड और सन् 1956 में प्रभावपूर्ण 30 पौंड तक हो गयी . - However , it was substantial and according to an estimate , the total availability in the pre-war years was 4,800 million yards or about 16 yards per person .
Zइफ़र भी यह उत्पादन काफी था और एक अनुमान के अनुसार युद्ध पूर्व के वर्षों में यह 48,000 लाख गज था . - The production of finer yam above count 50 increased from 15 million Ib in the pre-war years to 88 million Ib in 1948 .
पचास से ऊपर के कच्चे धागे का उत्पादन युद्ध पूर्व के वर्षों के 150 लाख पौंड से बढ़कर सन् 1948 में 880 लाख पौंड तक हो गया . - From the pre-war average of Rs 25 to 30 crores , exports during the five years 1939-40 to 1944-45 averaged Rs 50 crores .
युद्ध पूर्व के 25-30 करोड़ रूपये के औसत से सन् 1939-40 से 1944-45 तक पांच वर्षों के दौरान निर्यात का औसत 50 करोड़ रूपये हो गया .