डा.हेडगेवार वाक्य
उच्चारण: [ daa.hedegaaar ]
उदाहरण वाक्य
- समस्त हिन्दू समाज को जाति, पंथ, भाषा, मजहब की संकीर्णता से निकालकर एक समरस, संगठित और शक्तिशाली समाज के रूप में खड़ा करने के लिए जीवन-पर्यंत प्रयासशील रहे सुदर्शन जी ने मुम्बई से प्रकाशित निर्भय पथिक के डा.हेडगेवार विशेषांक (जनवरी 1989) में लिखा था, 'इस देश का हिन्दू समाज हजारों वर्षों तक समृद्धि एवं वैभव का जीवन जीने के बाद ईसा की नवमी और दशमी शताब्दियों में ऐसी रुढ़िग्रस्त अवस्था में पहुंच गया जहां गुण-कर्म पर आधारित वर्ण एवं जाति व्यवस्था को ऊंच-नीच का पर्याय मानकर हमारे ही लोगों ने राष्ट्र के उत्थान में बाधाएं खड़ी कर दीं।