सतख्यातिवाद वाक्य
उच्चारण: [ setkheyaativaad ]
उदाहरण वाक्य
- सतख्यातिवाद रामानुज का भ्रम विचार इस नाम से जाना जाता है इनके अनुसार स्मस्त जगत सत है उसकी स्त्ता वास्त्विक है उनके अनुसार कोई भी ज्ञान मिथ्या नहीं होता है, ज्ञान तथा ज्ञेय सदैव सत है,रज्जु सर्प उदाहरण में पंचीकरण सिद्धांत के अनुसार रज्जु में सांप का अशं भी मौजूद है, किंतु रज्जु में सांप के अंश की तुलना मे अप्ना अंश ही अधिका होत है इसी कारण इस को रस्सी कहा तथा देखा जाता है अतः यदि रज्जु मे सांप की प्रतीति हुई है तो यह भ्रम अपूर्ण पर्ंतु सत्य ज्ञा नहै