अयश का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- मुहम्मद साहब की कुल 12 पत्नियाँ थीं , जिनमे आयशा तीसरे नंबर पर आती है , अयश के पिता का नाम अबूबकर था जो मक्का में आकर बस गए थे , अयशा ( Arabic : عائشة ) का जन्म सन 612 ईo में हुआ था .
- मुहम्मद साहब की कुल 12 पत्नियाँ थीं , जिनमे आयशा तीसरे नंबर पर आती है , अयश के पिता का नाम अबूबकर था जो मक्का में आकर बस गए थे , अयशा ( Arabic : عائشة ) का जन्म सन 612 ईo में हुआ था .
- जहाँ किसी ने अपनी माँ का आदर नहीं किया है कहो कहाँ पर गरल अयश का उसने नहीं पिया है गौरव मिलता उसी वीर को जिसने माँ का मान किया माँ की खातिर खुद को जिसने हँस-हँस के कुर्बान किया उस माँ को ठुकराकर कैसे गीत और के गाएँ ? हिदी बोलें पढ़ें , लिखें सब हिंदी को अपनाएँ।
- एक बार तो संसार की ओर देखकर भरतजी अयश छूटने से निराश होते हैं ; पर फिर उन्हें आशा बँधती है और वे कैकेयी से कहते हैं कि ईश मेरा तो अयश हरेंगे , मैं तो मुँह दिखाने लायक हो जाऊँगा , पर तू अपने दिन कैसे काटेगी ? वे समझते हैं कि राम के आते ही मेरा अयश दूर हो जायेगा।
- एक बार तो संसार की ओर देखकर भरतजी अयश छूटने से निराश होते हैं ; पर फिर उन्हें आशा बँधती है और वे कैकेयी से कहते हैं कि ईश मेरा तो अयश हरेंगे , मैं तो मुँह दिखाने लायक हो जाऊँगा , पर तू अपने दिन कैसे काटेगी ? वे समझते हैं कि राम के आते ही मेरा अयश दूर हो जायेगा।
- एक बार तो संसार की ओर देखकर भरतजी अयश छूटने से निराश होते हैं ; पर फिर उन्हें आशा बँधती है और वे कैकेयी से कहते हैं कि ईश मेरा तो अयश हरेंगे , मैं तो मुँह दिखाने लायक हो जाऊँगा , पर तू अपने दिन कैसे काटेगी ? वे समझते हैं कि राम के आते ही मेरा अयश दूर हो जायेगा।
- चलिए साथ चलूँगा मैं साकल्य आप का ढोते , सारी आयु बिता दूँगा चरणों को धोते-धोते . ' वचन माँग कर नहीं माँगना दान बड़ा अद्भुत है , कौन वस्तु है , जिसे न दे सकता राधा का सुत है ? विप्रदेव ! मॅंगाइयै छोड़ संकोच वस्तु मनचाही , मरूं अयश कि मृत्यु , करूँ यदि एक बार भी ' नाहीं ' । '
- दीन विप्र ही समझ कहा-धन , धाम , धारा लेने को , था क्या मेरे पास , अन्यथा , सुरपति को देने को ? ' केवल गन्ध जिन्हे प्रिय , उनको स्थूल मनुज क्या देगा ? और व्योमवासी मिट्टी से दान भला क्या लेगा ? फिर भी , देवराज भिक्षुक बनकर यदि हाथ पसारे , जो भी हो , पर इस सुयोग को , हम क्यों अशुभ विचरें ? ' अतः आपने जो माँगा है दान वही मैं दूँगा , शिवि-दधिचि की पंक्ति छोड़कर जग में अयश न लूँगा .