आयसी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- विल्लाख चासू ” नामक ग्रन्थ में बताया गया है , आयसी ( रेवती ) , मंचूक ( अश्विनी ) , खन्श ( मूल ) , दायला ( मघा ) एवं खिचास्तो ( अश्लेषा ) में जन्म लेने वाले व्यक्तियों पर इस वृक्ष के पत्तो का कोई प्रभाव नहीं होता।
- गंधार के राजा रवेल की पुत्री विश्पला ने सेनापति का दायित्व स्वयं पर लेकर युद्ध किया . वह वीरता से लड़ी पर तंग कट गयी ,जब ऐसे अवस्था में घर पहुंची तो पिता को दुखी देख बोली -“यह रोने का समय नहीं,आप मेरा इलाज कराइये मेरा पैर ठीक कराइये जिससे मैं फिर से ठीक कड़ी हो सकूं तो फिर मैं वापस शत्रुओसे सामना करूंगी .”अश्विनी कुमारों ने उसका पैर ठीक किया और लोहे का पैर जोड़ कर उसको वापस खड़ा किया -“ आयसी जंघा विश्पलाये अदध्यनतम ”.[रिग्वेद्य १/ ११६]इसके बाद विश्पला ने पुनः युद्ध किया और शत्रु को पराजित किया.