बेवकूफ़ियां वाक्य
उच्चारण: [ bevekufeiyaan ]
उदाहरण वाक्य
- लीजिये, आज मिलिये ब्लॉग-जगत के कुछ और महारथियों से और पढिये उनकी बेवकूफ़ियां, उन्हीं की क़लम से-(समीर जी की एक शानदार कविता भी मेरे अधिकार क्षेत्र में है अब, सो यथासमय पोस्ट करूंगी)
- जब काम भर की बेवकूफ़ियां हो गयीं तो सब कुछ ठीक हो गया-हवाई जहाज ठीक से उड़ने लगा, टीवी चलने लगा, बगल के नेता जी अपने एक पार्टी से दूसरी पार्टी ज्वाइन करने के किस्से सुनाते-सुनाते सो गये।
- इस पढ़कर फ़िर अपनी पोस्ट याद आई-यात्राओं में बेवकूफ़ियां चंद्रमा की कलाओं की तरह खिलती है जब इसको फ़िर से पढ़ा तो इसका एक वाक्य और भी सार्थक लगा-बहस शुरू करने का आलस्य हमेशा सुकूनदेह होता है।
- जब काम भर की बेवकूफ़ियां हो गयीं तो सब कुछ ठीक हो गया-हवाई जहाज ठीक से उड़ने लगा, टीवी चलने लगा, बगल के नेता जी अपने एक पार्टी से दूसरी पार्टी ज्वाइन करने के किस्से सुनाते-सुनाते सो गये।
- यहां. खुशदीप भाई की समझदारी है-कल की मेरी पोस्ट पर वंदना अवस्थी दुबे जी का कमेंट मिला-* खुशदीप जी, आपकी मेल आईडी बहुत खोजी, नहीं मिली (बहुत मन था आपकी बेवकूफ़ियां पढ़ने और पढ़वाने का)...
- बहुत बढिया. ज़्यादा बढिया इसलिये क्योंकि यहां मेरा ज़िक्र है, तस्वीर सहित:):) “ बेवकूफ़ियां, जो यादगार बन गईं ” का आयोजन भले ही मैने किया हो, लेकिन उसे क़ामयाबी मिली आप सब के सक्रिय सहयोग से.
- अमरीका में विसंगतियां हैं लेकिन भारत में बेवकूफ़ियां हैं क्योंकी जनसंख्या के आधार पर नहीं प्रतिशत के आधार पर हमारे यहां प्रति १००० व्यक्ति बेवकूफ़ों की संख्या अधिक है-भरोसा ना होतो अपने घर से निकल कर चौराहे पर चले जाएं पान की गुमटियों पर खडे दिख जाएंगे सेंपल!
- अमरीका में विसंगतियां हैं लेकिन भारत में बेवकूफ़ियां हैं क्योंकी जनसंख्या के आधार पर नहीं प्रतिशत के आधार पर हमारे यहां प्रति १००० व्यक्ति बेवकूफ़ों की संख्या अधिक है-भरोसा ना होतो अपने घर से निकल कर चौराहे पर चले जाएं पान की गुमटियों पर खडे दिख जाएंगे सेंपल!
- बेवकूफ़ी इंसान का स्थायी भाव होता है, जबकि समझदार उसे, कोशिश करके बनना पड़ता है:(सब अपनी बुद्धिमानी की चर्चा तो खूब करते हैं, लेकिन बेवकूफ़ियां छुपा लेते हैं, ठीक उसी तरह, जैसे सड़क पर गिरने के बाद गिरने वाला चारों ओर देखता है कि उसे किसी ने गिरते हुए देखा तो नहीं?
- (सब अपनी बुद्धिमानी की चर्चा तो खूब करते हैं, लेकिन बेवकूफ़ियां छुपा लेते हैं, ठीक उसी तरह, जैसे सड़क पर गिरने के बाद गिरने वाला चारों ओर देखता है कि उसे किसी ने गिरते हुए देखा तो नहीं? दर्द तो घर जा के ही महसूस होता है, ऐसे ही बेवकूफ़ी करने के बाद पहली कोशिश उसे छुपाने की होती है:) लेकिन होली के बहाने हमने ब्लॉग जगत के धुरंधरों से कुछ छूट लेने की कोशिश की, अब होली है तो बुरा मानने की गुंजाइश भी नहीं है.