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realities मीनिंग इन हिंदी
realities उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- that these cultures could create different realities,
ये संस्कृतियां भिन्न-भिन्न वास्तविकताएं उत्पन्न कर सकती हैं; - It's just really about combining different realities.
यह वास्तव में सिर्फ विभिन्न वास्तविकताओं को जोड़ने के बारे में है | - This conspiracism points to a widespread unwillingness in the umma to deal with realities, preferring the safer bromides of plots, schemes, and intrigues. It also exposes major problems adjusting to modernity.
यह षड़यन्त्रवाद इस बात की ओर भी संकेत करता है कि उम्मा वास्तविकता का सामना करने के स्थान पर योजनाओं और षड़यन्त्रों के सुरक्षित वातावरण में घिरे रहना चाहता है. इससे आधुनिकता के साथ सांमजस्य बिठा पाने में उनकी असफलता की पोल भी खुलती है. - The process continues; this week, an Egyptian television station begins airing a 41-part blockbuster Ramadan special, Knight Without a Horse spreading The Protocols' defamation to a vast new audience and creating new legions of anti-Semites. That a forgery that helped cause the Holocaust is now openly published in New Jersey points to two important realities:
तब से इस एक जालसाजी ने लगातार - जहाँ भी यह प्रकट हुआ है - सार्वनिक जीवन को दुखित किया है। जैसा कि इटालियन उपन्यासकार उम्बेर्टो इको कहते है,” यह एक एक षड़यन्त्र है जो से दूसरे तक खुद भी पहुँचता रहता है। ” - This negativism reflects twin realities: Islamism (outside Iran) is waxing everywhere, while the civilized world is making profound mistakes - blaming itself for Muslim hatred, underestimating and appeasing the enemy. Several trends:
यह नकारात्मकता दो वास्तविकताओं को प्रतिबिम्वित करती है। इस्लामवाद ( ईरान से बाहर ) धीरे - धीरे सर्वत्र बढ़ रहा है जबकि सभ्य विश्व भयानक भूलें कर रहा है , स्वयं को मुस्लिम घृणा के लिए दोषी ठहरा रहा है तथा शत्रु को कमतर आंक रहा है और उसका तुष्टीकरण कर रहा है। कुछ रूझान - - Robert Kagan. Today's attitudes, Robert Kagan writes in a brilliant analysis in the Hoover Institution's Policy Review , “ Power and Weakness ,” follow logically from deeper realities. In particular, they result from two post-1945 developments so momentous they tend to go unnoted:
राबर्ट कागन ने हूवर इंस्टीट्यूट के नीतिगत सर्वेक्षण Power and Weakness ,” में अपने मेधावी विश्लेषण में लिखा है कि आज का व्यवहार कुछ गहरी तार्किक वास्तविकताओं का परिणाम है। विशेष रूप से ये 1945 के पश्चात के दो घटनाक्रम का परिणाम हैं जो कि अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और उन पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। - That's all very nice but - breaking news, here - not exactly everyone accepts that the land is “ours by ... natural right.” For those skeptics it helps to establish that the land was legally acquired. This critique at Commentary reminds me about the disdain for Palestinian recognition of Israel as the Jewish state (on which, see my weblog entry, “ Israel Does Not Need Palestinian Recognition? ”), where Zionists also manifest too much pride to heed realities. Comment on this item
इजरायलवालों को चाहिये कि वे अपना सर ऊँचा रखें और बतायें कि उनके देश का निर्माण इतिहास में किसी भी देश के लोगों की तुलना में सबसे कम हिंसक और सभ्य आंदोलन पर आधारित है। गिरोहों ने फिलीस्तीन को चुराया नहीं है वरन व्यापारियों ने इजरायल को खरीदा है। - Also about this same time, Saddam began insisting on only good news, isolating himself further from often harsh realities. As ever-fewer underlings dared to contradict the boss's perceptions, his determined self-deception wreaked havoc outward from the presidential palace to the entire Iraqi government and beyond. The lead author of Iraqi Perspectives Project , Kevin M. Woods, and his four co-authors note, “By the mid-1990s, most of those near the regime inner circle recognized that everyone was lying to everyone else.” Deceits were reinforced and elaborated. In the words of an air defense officer, “One [officer] lied to another from the first lieutenant up, until it reached Saddam.”
अच्छे ढंग से लिखी हुई, ऐतिहासिक सन्दर्भों से युक्त तथा अनेक विवरणों को उद्घाटित करने वाली इस पुस्तक को उस शासनकाल का वर्णन करने वाली कनान माकिया की कुशल Republic of Fear की श्रेणी में रखा जा सकता है. (संक्षिप्त संस्करण के लिये मई-जून का Foreign Affairs संस्करण देखें) - In short, with Option #1 undermined and Option #3 unacceptable, Option #2 - war carried out by either U.S. or Israeli forces - becomes the more probable. Thus have short-sighted, small-minded, blatantly partisan intelligence bureaucrats, trying to hide unpleasant realities, helped engineer their own nightmare. Related Topics: Iran , US policy receive the latest by email: subscribe to daniel pipes' free mailing list This text may be reposted or forwarded so long as it is presented as an integral whole with complete and accurate information provided about its author, date, place of publication, and original URL. Comment on this item
संक्षेप में कहें तो , विकल्प नम्बर एक के पतन और विकल्प नम्बर तीन की अस्वीकार्यता के मध्य विकल्प नम्बर दो - अमेरिकी अथवा ईजरायली सेनाओं द्वारा युद्ध की कार्यवाही - एक ज्यादा मजबूत विकल्प नजर आता है इस तरह एक अदूरदर्शी , संकुचित सोच वाली और साफ तौर पर पक्षपाती खुफिया नौकरशाही ने अप्रिय वास्तविकताओं को छुपाने के प्रयास में एक भयानक दु:स्वरूप को जन्म दे दिया है । - I agree with Ms. Benard's general approach, doubting only her enthusiasm for Muslim modernists, a group that through two centuries of effort has failed to help reconcile Islam with current realities. H.A.R. Gibb, the great orientalist, condemned modernist thinking in 1947 as mired in “intellectual confusions and paralyzing romanticism.” Writing in 1983, I dismissed modernism as “a tired movement, locked in place by the unsoundness of its premises and arguments.” Nothing has changed for the better since then.
सुश्री बेनार्ड की सामान्य अवधारणा से मैं सहमत हूं परंतु दो शताब्दियों में वर्तमान वास्तविकताओं के साथ इस्लाम की तालमेल करने की असफलता के कारण उनके अतिउत्साह को लेकर संदेह है . महान प्राच्य विद्वान एच.ए.आर गिब्स ने आधुनिक चिन्तन को 1947 में बौद्धिक संशय और स्वच्छन्दतावाद को लकवाग्रस्त करने वाला करार दिया . 1983 में मैंने आधुनिकतावाद को एक थका हुआ आंदोलन बताया था जो अपने तर्कों के कारण सीमित हो गया है . तबसे लेकर आज तक कुछ भी परिवर्तित नहीं हुआ है .